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Maharashtra Ganeshotsav Archive
2026-01035
केदारेश्वर मंदिर – कालचक्र के चार युग

इस वर्ष हमारे गणेश मंडल की सजावट हरिश्चंद्रगढ़ स्थित पवित्र केदारेश्वर मंदिर की गुफा से प्रेरित है। केदारेश्वर गुफा में स्थित शिवलिंग के चारों ओर चार स्तंभों को लोकमान्यता के अनुसार चार युगों — सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि समय के साथ तीन स्तंभ नष्ट हो चुके हैं और एक स्तंभ आज भी विद्यमान है, जो वर्तमान कलियुग का प्रतीक माना जाता है। इसी पौराणिक कथा को हमने इस वर्ष अपनी सजावट के माध्यम से जीवंत करने का प्रयास किया है। हमारी सजावट में दिखाई देने वाले चार स्तंभ चार युगों का प्रतिनिधित्व करते हैं: सतयुग → त्रेतायुग → द्वापरयुग → कलियुग इन चार युगों के मध्य स्थित शिवलिंग सनातन और शाश्वत शक्ति का प्रतीक है। उसी पवित्र वातावरण में विराजमान श्री गणराय इस संकल्पना को एक आध्यात्मिक पूर्णता प्रदान करते हैं। गुफा का वातावरण, प्राकृतिक चट्टानों का स्वरूप, शिवलिंग और चार युगों के प्रतीक स्तंभ—इन सभी के माध्यम से हमारा प्रयास केवल केदारेश्वर मंदिर की प्रतिकृति बनाना नहीं, बल्कि समय, आस्था और सनातन परंपरा की एक कथा प्रस्तुत करना है। हमारी संकल्पना का संदेश चार युग बीतते गए, समय बदलता गया, लेकिन ईश्वर की शक्ति और श्रद्धा आज भी शाश्वत है। जहाँ काल का अंत नहीं, जहाँ आस्था का क्षय नहीं, वहीं केदारेश्वर के चरणों में विराजमान हैं श्री गणराय।
- Kind
- Story
- Place
- Thane
- Art
- Architecture (Vāstu-vidyā) · Kala 29
- Contributed by
- Recorded, name withheld by the contributor
- Submitted
- 17 September 2026
- Accepted
- 17 September 2026
Evidence
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